...is "Celebrating (un)Common Creativity!" Fan fiction, artworks, extreme genres & smashing the formal "Fourth wall"...Join the revolution!!! - Mohit Trendster
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Thursday, April 5, 2018

झूठी भावना पर सच्चा आशीर्वाद (कहानी) #ज़हन

Artwork #WIP by Esmeralda Platania‎

सोशल मीडिया स्टार रूपल के पास कोई ख़ास हुनर नहीं था। अपनी तस्वीरें, निजी ज़िंदगी इंटरनेट के माध्यम से दुनिया को परोसने के बदले में कुछ नाम और पैसा मिल जाया करता था। वैसे उसके कई हज़ार फॉलोवर्स थे पर यहाँ "कुछ" का मतलब उसके जैसी बिना हुनर वाली बड़ी हस्तियों के मुक़ाबले काफी कम। फिर भी स्थानीय स्तर पर उसका अच्छा काम चल जाता था। भावनात्मक मुद्दों पर इंटरनेट से काट-छांट कर बनी उसकी बातें, कई सामाजिक कैंपेन की आड़ लेकर अपने पब्लिसिटी कैंपेन चलाना आदि रूपल की खूबी थी। रूपल की माँ श्रीमती सुनैना लिवर कैंसर से पीड़ित थी। पिछले कई हफ़्तों से वह इस लिवर कैंसर की पोस्ट्स से लोगो की सहानुभूति का लिवरेज ले रही थी। ऐसी भावनात्मक बातों पर आम बातों, फोटोज़ से कहीं ज़्यादा प्रतिक्रिया आती थी। इस वजह से आभासी दुनिया में रूपल के "प्रशंसकों" की संख्या तेज़ी से बढ़ रही थी। रूपल को जब पता चला कि उसकी माँ की बीमारी गंभीर हो चली है और वें अब कुछ ही दिनों की मेहमान हैं तो वह चिंता में पड़ गयी। इधर सुनैना अपनी बच्ची को दिलासा दे रहीं थी कि उनके बिना भी इतना कुछ है दुनिया में वह किसी बात की चिंता ना करे। यहाँ रूपल की चिंता सुनैना की सोच से कुछ अलग थी। 

दो दिन बाद ही सुनैना ने नींद में दुनिया छोड़ दी पर शायद उनकी आत्मा में दुनियादारी का मोह बचा था। इस कारण अपने परिजनों को देखने और उनके मन में झाँकने को रुक गयीं। सब जगह से अच्छी-बुरी यादें, अपनों के मन की बातें टटोल कर आखिर में सुनैना की आत्मा रूपल के पास पहुँची। 

"रो नहीं रही है? ज़रूर सदमा लग गया है बेचारी को! हे भगवान! मेरी लाली ने गुम चोट की तरह अपने ग़म को मन में दबा लिया। ज़रा मन में तो झाँकू इसके..."

रूपल के मन में दंगे चल रहे थे....

"क्या यार! थोड़े दिन बाद नहीं जा सकती थी मम्मी? इतना मटेरियल जमा कर रखा था मैंने....थोड़ा-थोड़ा करके ऑनलाइन डालती। अब खुद उनकी डेथ की अपडेट नहीं कर सकती...सब कहेंगे मातम की जगह नौटंकी कर रही हूँ। काश रश्मि, प्रियंका लोग आ जायें तो वो तो अपनी फोटोज़, अपडेट्स में टैग-मैंशन कर ही देंगी...उनकी फॉलोइंग भी अच्छी है।"

बेटी की नादानी पर सुनैना मुस्कुरा उठी। किसी माँ को अपने बच्चों पर गुस्सा आता ही कहाँ है? जाते-जाते माँ ने रूपल की इच्छा पूरी कर दी...समूह में रूपल की माँ की मौत वाली खबर फैलने से 2-4 नहीं बल्कि दर्जनों रूपल जैसी सोशल मीडिया हस्तियां 'सांत्वना' की कैंडी लेकर उसके घर पहुँची। उस दिन सौइयों फोटो में दिख रही रूपल और उसके दुख की सुनामी में इंटरनेट बह गया। एक घटना से रूपल के इंटरनेट वाले आभासी जानकारों की गिनती लाखों-करोड़ों में पहुँच गयी...माँ का आशीर्वाद जो साथ था।

समाप्त!
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Tuesday, December 12, 2017

कला में संतुलन की कला :) #Hindi_Article


“लाइफ इज़ नॉट फेयर”, ये प्रचलित कहावत है। मैंने पहले कई बार कलाकारों की दयनीय स्थिति पर बात रखी है। आज एक अलग सिरे से विचार रख रहा हूँ।  कलाकार अगर प्रख्यात हो जाये तो जीवन सही है और अगर ना हो तो लाइफ इज़ नॉट फेयर? नहीं! मैंने अलग क्षेत्रों के कई तरह के कलाकारों में एक बात देखी, जिसे शायद वो समझा ना पाएं। प्रख्यात होना बहुत से कलाकारों के लिए हानिकारक होता है। कई लोग लगातार अपनी कला में कुछ ना कुछ करते, उसके बारे में सोचते रहना चाहते हैं। प्रख्यात होने के बाद व्यक्ति को अवसर मिलते हैं, जीवन-यापन सुगम हो जाता है, पर उस स्तर पर आने के बाद व्यक्ति क्या खो देता है…

जब आपके हर काम पर जनता की नज़र हो और हर कला के पीछे किसी और के लाखों या करोड़ों रुपये लगे हों तो अपने आप दबाव बन जाता है। वो स्वच्छंदता जो इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट के पास होती है, उसका काफी सीमा तक बलिदान देना पड़ता है। उदाहरण के लिए बड़े स्तर पर एक म्यूजिक एल्बम या किताब प्रकाशित होने पर उसके प्रचार-प्रसार, लोगों को उस किताब/संगीत के अवयव बार-बार समझाने में काफी समय व्यर्थ होता है। कई वर्षों तक ऐसा होने पर कलाकार अपने सक्रीय जीवन का (जब उसका मस्तिष्क और शरीर अच्छी हालत में रचनात्मकता का साथ देते हैं) बहुत बड़ा हिस्सा और शक्ति प्रमोशन, फॉलो-अप आदि गतिविधियों में बिता देता है।

कलाकार की रचनात्मक स्वतंत्रता केवल उसके लिए ही नहीं समाज के लिए महत्वपूर्ण है। सफल होने के बाद जुड़े लेबल, पैसे और औद्योगिक प्रतिबद्धता के सीमित दायरे में वह पूरी तरह अपनी मर्ज़ी का मालिक नहीं हो पाता। चाहे बाहर से वह अपने निर्णय लेता दिखे पर उसके अवचेतन मन में आ चुकी बातें अक्सर उसे रोक लेती हैं। साथ ही प्रयोगों के आभाव में एक कलाकार के रूप में उसका विकास धीमा पड़ जाता है। हालाँकि, छोटी संख्या में कलाकार ऐसे भी हैं जो इन दो बातों के बीच संतुलन बनाने में सफल हो जाते हैं। ये संतुलन पूर्णतः व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है। ऐसा तभी संभव है जब कला को अपनी प्राथमिकता रखा जाए, चाहे व्यक्ति किसी भी स्तर पर पहुँच चुका हो।

इस नये कोण से बातों को देखने का आशय संतुलन बनाने का महत्त्व बताना था। याद रखें कला चलाये रखने के लिए कुछ हद तक सफलता भी ज़रूरी है। पैसों के अभाव, मजबूरियों में कला ही छोड़नी पड़े से बेहतर चाहे खालिस कमर्शियल ही सही कला का जारी रहना है। 

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Artwork - Richard F.
#ज़हन

Monday, January 20, 2014

Online Community - 421 Brand Beedi Federation

421 Brand Beedi Federation, a community blog & online group of people & their audience who post Multilingual Previews, Reviews, Interviews & Point of Views of/for/with/about various products, movies, books, people, things & events...we try to be as random as possible.

*) - Blog: 421 Brand Beedi Federation 

*) - FB Page: 421 Brand Beedi Federation | Facebook

*) - Partner Groups: Freelance Talents, Spandan, Indian Comics Fandom. 

Founded - September 2012

            Contributors

Friday, January 4, 2013

Tuesday, March 13, 2012

*Trendy Baba Update*

An optional feature on Facebook allows people to subscribe partially/fully to anyone's updates instead of sending friend request, which people use to get celebrity updates as their multiple social accounts reach maximum friend limit in no time & for many its not possible to update their page regularly.



If someone sends you a friend request he/she automatically becomes your subscriber which not many people are not aware of. (The person sees the increasing number of his subscribers & keeps suspending new friend requests) Now, if you visit a normal profile with many subscribers that doesnt mean that the person is popular or celebrity (unless he/she is a celebrity) & people are interested in his/her updates. This indicates that the person (generally) is not accepting friend requests & not rejecting them either & thus automatically making people his/her subscribers & increasing them to show off.

Grow up Kids!

Share it! (if you like it & agree)

- Mohit Sharma (Trendy Baba)

P.S. - Subscribe & Friend Request tabs are separate.

Sunday, March 11, 2012

मोहित मिला भगवान जी (के अंश) से! [Message to Internet Users]

मोहित मिला भगवान जी (के अंश) से!




मोहित की लिखी नॉवेल का क्रेडिट उसके पब्लिशर ने किसी बड़े लेखक को दे दिया.

मोहित एक पहाड़ी पर चढ़ गया और चिल्लाया. उसकी आवाज़ वादियों मे गूंजने लगी.

"भगवान...(echo - भगवान.... भगवान.....भगवान.....भगवान......भगवान...!!!!!)
आज.....(echo - आज......आज......आज.....आज......आज........!!!!!!)
मै....(echo - मै....मै......मै......मै........!!!!!)"

उसकी आवाज़ को एक आकाशवाणी ने रोका.

"ज्यादा फुटेज मत खा...ECHO से ही तेरी फेसबुक की केरेक्टर लिमिट ख़त्म हो जायेगी. पता है हमे की तेरे किये का क्रेडिट किसी और ने ले लिया है...पर ये तो दुनिया है यहाँ copy, cheat .....सब चलता रहता है. यही जीवन के खेल है."

मोहित : "भगवान जी? इतनी जल्दी कैसे आ गये???? ये कौन मुझे भोंपू से बोलकर उल्लू बना रहा है...? आज कल कोई काम नहीं है लोगो के पास!"

{नोट - पहाड़ी पर सभी आवाजें By Default गूँज रहीं है!}

"उल्लू.. तो तुम रेडीमेड हो...मै भगवान का एक छोटा सा अंश हूँ ....मुझे पता है आज तुम्हारा व्रत है और तुम सुबह से 4 गिलास भर के चाय पी चुके हो."

मोहित : "ये बात तो सिर्फ मम्मी को पता है तो क्या...मम्मी...ऊँह-हुंह....क्या मम्मी ये कैसा मजाक है...कहाँ छुपी हो आप....आवाज़ कैसे बदल ली...अच्छा!! मेरी चाल मुझी पर...और मै इतने दिनों से नयी शर्ट खरीदवाने को कह रहा हूँ वो नहीं ली गयी...ये भोंपू खरीद लिया बिना बात के..."

"अबे ओये...मुझे ये भी पता है की पहाड़ी पर आते समय तूने खस्ता, जलेबी भी पेल दिए है...व्रत रखना नहीं आता तो क्यों स्टाइल मारते हो?"

मोहित : "खस्ता? जलेबी? ये बात तो...छी छी छी...नाथू हलवाई..मै तुम्हारा रोज़ का कस्टमर हूँ एक दिन खुले पैसे नहीं दिए तो यहाँ तक भोंपू लेके पीछा करोगे?"

"बेटा, मेरा टेस्ट मत लो...अभी बिजली कड़कड़ा दूँगा तो मिलोगे नहीं. तुमने पिछले जन्म मे तपस्या की थी पर जब हम प्रकट हुए और तुम्हे तपस्या से जगाया तो तुम हमे देख कर इतने खुश हुए...की ख़ुशी के मारे चल बसे. इसलिए हम तुम्हारी तपस्या का तेज, तुम्हारी मनोकामना इस जन्म मे फारवर्ड कर रहे है. अब भी विश्वास न हो तो आज तुमने स्किन कलर कि....या रुको आज तो तुमने अंदर.... "

मोहित : "नो....नहीं..ओके!....मै मान गया....कि आप भगवान के अंश है....मेरी इच्छा ये है की दुनिया मे रेगुलर चोरी और चीटिंग करने वाले लोगो को आप नर्क मे एक महीने का क्रेश कोर्स करवाए की वो जीवन मे फिर ऐसे काम ना करे."

"तथास्तु!"

और मोहित वापस नाथू हलवाई की दूकान पर चला गया.

अगले दिन मोहित फिर से उस पहाड़ी पर पहुँच गया था.

मोहित : "भगवान...(echo - भगवान.... भगवान.....भगवान.....भगवान......भगवान...!!!!)"

"बक! क्या कुछ बिमारी है क्या तुम्हे? तुम किसी सुनसान मंदिर नहीं आ सकते? ये सुसाइड पॉइंट है..पीछे से कोई धक्का दे देगा या तुम्हे धप्पा बोल देगा न तो तुम्हारे मरने का क्रेडिट तुम्हे ही मिलेगा इस बार, छगन भुजबल कहीं के! "

मोहित : "भगवान जी के अंश जी! दुनिया के कई लोग अचानक गायब हो गए है! वो तो ठीक है क्योकि शायद वो लोग नियमित चोरी या चीटिंग, आदि करते होंगे. पर फेसबुक, आदि सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मेरे 500 से ज्यादा दोस्तों मे से 25 रह गए है....बाकियों के घर से उनके गायब होने की खबर आ रही है. क्यों?"

"क्योकी वो सब के सब कभी कबार नही बल्की अपनी UPDATES, PICS, ETC पर 'REGULARLY' पहले से Popular Songs, Quotes, Titles, Ghazals, Lines, आदी लगाते रहते थे!!!!"


.......THE END!!!!!!!!!


शिक्षा - कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि आपकी खुद कि सोच बहुत खूबसूरत है. अपने शब्दो मे अपनी बात लिखीये चाहे वो "उनसे" बेहतर न हो पर ORIGINAL और आपकी अपनी तो होगी.....कभी-कभी कि बात अलग है.....मगर अक्सर दूसरो कि मेहनत पर मुफ्त कि लाईकस, कमेंट चाहना गलत है.....और छोटी हो या बडी....चोरी तो चोरी होती है...क्यों है ना?