...is "Celebrating (un)Common Creativity!" Fan fiction, artworks, extreme genres & smashing the formal "Fourth wall"...Join the revolution!!! - Mohit Trendster
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Tuesday, April 18, 2017

मरणोपरांत आशीर्वाद (कहानी) #ज़हन


पत्नी के देहांत के बाद रविन्दु सामंत गहरे अवसाद में चले गए थे। उनकी दिनचर्या अपने कमरे तक सीमित हो गयी थी। वहीं उनके तीन बच्चो की अब और इंतज़ार करने की इच्छा नहीं थी। एक शांत दिन उनके 3 बच्चो ने उन्हें बेहोशी की दवा सुंघा कर बेहोश किया और फिर पंखे से टांग कर उन्हें मार दिया गया, कुछ इस तरह कि पत्नी की मौत के शोक में उनकी मौत एक आत्महत्या लगे। उनकी लिखाई से मिलता-जुलता नोट रखने जा रहा उनका छोटा बेटा राजदीप कुछ देखकर ठिठक गया। पुलिस के सामने दी जाने वाली अपनी कहानी का रिहर्सल कर रहे उसके बड़े भाई-बहन ने कारण पूछा तो जवाब आया - "यहाँ तो पहले से एक नोट पड़ा है!"

"नोट है या ऐसे ही कोई रसीद-वसीद?"

राजदीप - "नोट ही है, लिखा है वो हम पर बोझ नहीं बनना चाहते थे और संपत्ति हम तीनो में बाँटकर आज रात पापा हमेशा के लिए ऋषिकेश के एक आश्रम जाने वाले थे।"

3-4 क्षण अवाक रहने के बाद तीनो बिना नज़रे मिलाये फिर अपने काम में लग गए। कुछ समय बाद पुलिस औपचारिकता निभा कर चली गई। एक हफ्ता बीतने के बाद रविन्दु सामंत के इंश्योरेंस एजेंट की शिकायत पर पुलिस का जांच दल दोबारा उनके घर आया। बीमा एजेंट के अनुसार रविन्दु सामंत के सुसाइड नोट की लिखावट उनकी राइटिंग से पूरी तरह नहीं मिलती थी। पुलिस टीम द्वारा जांच के लिए कुछ सामग्री जप्त की गयी और थोड़े दिन के बाद नतीजे की पुष्टि की बात हुई। तीनों भाई-बहन के चेहरे सफ़ेद पड़ गए और उन्हें जेल दिखने लगा। उन्हें यकीन था कि पुलिस के विशेषज्ञ लिखावट में अंतर पकड़ लेंगे। 5 दिनों बाद उन्हें सभी पत्र और जांच के लिए जप्त की गयी सामग्री वापस कर दी गयी। राजदीप अचंभित था कि आखिर कैसे दोनों लिखावट मिल गयीं और वो लोग बच गए? वह सारे पत्र देखने लगा और एक कागज़ देखकर उसे सांप सूँघ गया।  भाई ने कहा "चलो जान बची, पर तू सिर पकडे क्यों कांप रहा है? ठण्ड रख! अब कोई नहीं आ रहा हमें पकड़ने।"

राजदीप - "सुसाइड नोट की राइटिंग तो मैच हो गयी पापा की लिखावट से पर यह सुसाइड नोट वो नहीं जो मैंने लिखा था... "

समाप्त!
#mohitness #mohit_trendster #मोहित_शर्मा_ज़हन

Saturday, July 9, 2016

एकल-युगल-पागल (कहानी) - मोहित शर्मा ज़हन

"जी सर! मैंने चक्कू घोंप दिया ससुरे की टांगों में अब आपका जीतना पक्का।"

टेनिस एकल प्रतिस्पर्धा में स्टीव जो एक जाना-पहचाना नाम था, जिसके नाम कुछ टाइटल थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान वह सफलता से दूर ही रहा। फिटनेस के हिसाब से उसमे 2-3 सीजन का खेल बचा था और इस बीच वह अधिक से अधिक टाइटल अर्जित करना चाहता था। सबसे पहले वह तुलनात्मक रूप से आसान और नीची रैंक के खिलाड़ियों से भरे टूर्नामेंट चुनता था ताकि उसके जीतने की सम्भावना बढ़े, किस्मत से वह एक नामी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचा जहां उसका प्रतिद्वंदी दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी था। इस खिलाड़ी से पार पाना स्टीव के बस की बात नहीं थी। स्टीव ने उस खिलाड़ी को घायल करवाने के लिए अपने एक जुनूनी देशवासी को ब्रेनवाश किया कि देश के नाम और सम्मान के लिए उसे वर्ल्ड नंबर वन को खिलाड़ी घायल करना है। पूरी रात पार्टी कर अगले दिन वॉकओवर मिलना सुनिश्चित मान स्टीव कोर्ट पर उतरा जहाँ फिट्टम-फिट दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी उसका इंतज़ार कर रहा था। उसके पैरो तले ज़मीन और खोपड़े छज्जे आसमान खिसक गए। काश कल न्यूज़ में कन्फर्म कर लेता तो दारु तो ना पीता, अब तो 6-0, 6-0 पक्का! पता नहीं किस बेचारे के पैरों में चक्कू घोंप दिया गधे ने? 

बगल के कोर्ट में इस प्रतियोगिता का युगल (डबल्स) टेनिस खेल रही एक टीम को वॉकओवर मिला क्योंकि उनकी विरोधी टीम के एक खिलाड़ी पर पिछली रात टांगलेवा हमला हुआ था, यह खिलाड़ी विश्व डबल्स टेनिस में नंबर एक रैंक पर था। 

इस कहानी से शिक्षा मिलती है जुनूनी के साथ-साथ थोड़ी अक्ल वाले बंदे-बंदियों से ऐसे काम करवाने चाहिए।

समाप्त!

Tuesday, June 28, 2016

ज़रूरत (कहानी) - मोहित शर्मा ज़हन


तकनीकी गड़बड़ी से एक यात्री विमान ज़मीन से हज़ारों मीटर ऊपर भीषण डीकम्प्रेशन से बिखर कर बंगाल की खाड़ी में गिर गया था। अचानक दबाव के लोप हुआ धमाका इतना भीषण था कि किसी यात्री के बचने की संभावना नहीं थी। 279 यात्रियों और विमान दल में केवल 112 व्यक्तियों की क्षत-विक्षत लाशें मलबे से चिपकी या तैरती मिली, बाकी लोगो को सागर लील गया। बैंक लिपिक रूबी के पिता शॉन इस फ्लाइट में थे। पूरे दिन के सफर के बाद जांच-बचाव केंद्र पर पहुंच कर रूबी को पता चला की एक को छोड़कर बाकी सभी शवो की उनके परिजनों द्वारा पहचान हो चुकी है। हाल ही में कैंसर पीड़ित अपनी माँ को खो चुकी  रूबी ने बुझे मन से आखरी शव को देखा तो चेहरा और शरीर पहचान में न आ सकने वाली हालत में थे, पर शव के पैर पर चोट का लंबा निशान रूबी के लिए अपने मृत पिता को पहचानने के लिए काफी था। सिसकती हुई रूबी औपचारिकताओं के लिए आगे बढ़ी तो उसे एक आवाज़ ने रोका। 

"तुम्हे कोई गलतफहमी हो गई है बेटी! यह मेरे पति हैं।"

रूबी ने उस वृद्धा को दया से देखा और कुछ देर समझाने की कोशिश की, पर वह औरत अपनी बात पर अड़ी रही। थोड़े समय बाद रूबी के सब्र का बांध टूट गया और वह उस बूढ़ी महिला पर चिल्लाने लगी। आस-पास अन्य यात्रियों के कुछ परिजन और जांच अधिकारी आ गए। भीड़ मे कोई बोला - "अरे...ये औरत पागल हो गई है। पहले 2 लाशों को अपना पति बता रही थी फिर वहां से भगाया इसे।" 

अब रूबी ने उस औरत पर ध्यान दिया, उसका हुलिया व्यवस्थित था। वह शांत थी और उसके व्यवहार में पागलपन जैसा कुछ नहीं दिख रहा था। 

एक अधिकारी ने मामला सुलझाना चाहा - "देखिए अगर शव पहचान में विवाद है तो डीएनए जांच के लिए भेजे जा सकते हैं।" 

रूबी - "नहीं ऑफिसर! डीएनए टेस्ट मत करवाइये, मैं अपना क्लैम वापस लेती हूँ...यह मेरे पिता नहीं हैं।"

सबकी अविश्वास भरी नज़रों और मुँह पर लेकिन के जवाब में रूबी दबी ज़ुबान में बोली "...शायद इस समय मुझे मेरे पिता से ज़्यादा इन्हे इनके पति की ज़रूरत है।"

एक बार शव को प्यार से छूकर रूबी ने नम आँखों से ही पिता का अंतिम संस्कार कर विदा ली। 

समाप्त!

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelance_talents #freelancetalents

Sunday, June 19, 2016

अकूत संपत्ति (कहानी) - मोहित शर्मा ज़हन


2 पुराने दोस्त राजीव मेहरा और मयंक शर्मा 18-20 सालों बाद मिले थे। भाग्य के फेर से अपनी ज़िंदगियों में काफी व्यस्त और एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर की शुरू के कुछ सालों बाद दोनों जैसे भूल ही गए अपने जिगरी यार के हाल-चाल लेना। इतने समय में कई चीज़ें बदल गयीं थी। अब प्रौढ़ अवस्था में वो किशोरों वाली फुर्ती नहीं थी और न ही हर बात पर ठहाके-ठिठोली। हाँ, पर दोनों की आँखों में वही पहले वाली चमक थी। बातें करते-करते दोनों छत पर आ गए, किनारे चेस बोर्ड और प्यादे पड़े थे। 

मयंक - "यार पहले की तरह उछला-कूदा नहीं जा सकता पर चेस तो खेल ही सकते हैं। आ बैठ चारपाई पे!"

दोनों चेस की बाज़ी के साथ जीवन की बातें करने लगे। 

राजीव - "भाई बड़ा मलाल हो रहा है। एक प्रॉपर्टी मुझे 4 साल पहले 37 लाख की मिल रही थी, मैंने तब ली नहीं किसी और चक्कर मे पड़ा था। उसके आस-पास कुछ सोसाइटी अप्रूव हो गईं, हाई-वे बन गया अब कीमत 8 करोड़ है उसकी। उस समय इधर ध्यान दिया होता, नादानी न की होती तो आज तेरा भाई आराम से रिटायर होता।"

मयंक - "बुरा हुआ!...तेरी बात से याद आया मैंने भी करोड़ो-अरबों की संपत्ति गंवा दी अपने हट और नादानी की वजह से।"

राजीव - "मज़ाक मत कर यार! मैं तुझे जानता हूँ... तू ठहरा एक साधु आदमी, ये प्रॉपर्टी वगैहरह में तू कभी नहीं पड़ने वाला।"

मयंक - "सोनिया देशपाल का नाम सुना है?"

राजीव - "हाँ, वो बैडमिंटन मे वर्ल्ड नंबर वन ना? अभी ओलिम्पिक मे कोई मेडल भी जीता है बच्ची ने..."

मयंक - "हाँ, वही! अंदर 14 नेशनल मीट में मेरी 12 साल की बच्ची रूपल ने अपनी सीनियर सोनिया को फाइनल मे हराया था। पढ़ाई मे औसत थी वो और क्लास 7 बड़ी मुश्किल से पास करवाई थी हमने उसे। टूर्नामेंट के बाद उसके क्लास 8 के पेपर थे, उसका ध्यान न डिगे इसलिए नेशनल मीट के बाद मैंने और तेरी भाभी ने इसे इतना मारा और सुनाया की उसने बैडमिंटन छोड़ दिया और यही हम चाहते थे।"

राजीव - "ओह! भाई ये तो बड़ी गलती हो गई! आज शायद रूपल भी सोनिया जैसे मेडल ला रही होती, बाहर के टूर्नामेंट जीत रही होती...पर तूने तो सिर्फ छोटी निवेदिता से मिलवाया। रूपल कहाँ है?"

मयंक - "उसके कुछ दिन बाद तनाव में रूपल ने आत्महत्या कर ली...अरबों-खरबों की संपत्ति, अपनी परी को मैंने अपने पागलपन में गंवा दिया।"

समाप्त!

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#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelancetalents #freelance_talents

Saturday, July 18, 2015

कुछ पल और गुज़ार ले... | मोहित शर्मा (ज़हन)

Artwork - Kinannti
रजनी का एक राष्ट्रीय चिकित्सीय प्रतियोगी परीक्षा का यह अंतिम अवसर था। रजनी की मेहनत घर में सबने देखी थी और डॉक्टर बनने का सपना भी लगनशील रजनी और उसके परिवार ने साथ देखा था। यह लगन ऐसी संक्रामक थी कि जीवन में कोई ध्येय ना लेकर चलने वाली, स्वभाव में विपरीत रजनी की जुड़वाँ बहन नव्या, सिर्फ उसके सहारे मेडिकल फील्ड लिए बैठी थी। यह रजनी की संगत का ही असर था जो पढाई में कमज़ोर नव्या ने अच्छे अंको से दसवी, बारहवीं पास की थी, यह नव्या भी इस राष्ट्रीय परीक्षा में अंतिम अवसर था। इंटरनेट पर परिणाम घोषित हुआ और एक बार फिर से रजनी बहुत कम अंतर से असफल हुयी। रजनी का जैसे पूरा संसार ही अंधकारमय हो गया। जब तक कोई कुछ समझाता, समझता उस से पहले ही रजनी ने आत्महत्या कर ली। 

नव्या को पहले ही पता था कि वह सफल नहीं हो पाएगी और परिणाम ने उसके अंदेशे पर मोहर लगा दी पर खुद से ज़्यादा दुख नव्या को अपनी मेहनती बहन रजनी के लिए था। अब उसे लगा कि काश उसे थोड़ा समय मिल पाता अपनी बहन को समझाने का। माता-पिता अविश्वास से एकटक कहीं देखकर अपनी कल्पनाओ को सच्चाई पर हावी करने की हारी हुयी कोशिश कर रहे थे। कुछ समय बाद अपने परिवार के लिए नव्या ने स्वयं को संभाला और क्लीनिकल रिसर्च में 8 महीनो का कोर्स कर उसे अच्छे वेतन पर एक विदेशी कंपनी में नौकरी मिली। नव्या को पता था कि अगर उसकी जगह उसकी बहन होती तो अपने ज्ञान और मेहनत के दम पर उस से अच्छे स्थान पर होती, उस स्थान पर जो  उसे उस प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के बाद भी ना मिलता। कुछ समस्याएँ जो कभी जीवन को चारो और से घेरे ग्रहण लगाये सी प्रतीत होती है, जिनके कारण सुखद भविष्य की कल्पना असंभव लगती है, चंद महीनो बाद ऐसी समस्या का अस्तित्व तक नहीं रहता। थोड़ा और समय बीत जाने के बाद  तो दिमाग पर ज़ोर डालना पड़ता है कि ऐसी कोई दिक्कत थी भी जीवन में। नव्या अक्सर सपने में रजनी को समझाते हुए नम आँखें लिए जाग जाती है - "बहन! बस ये थोड़े लम्हें काट ले, जो इतना सहा...वो दर्द सहकर बस कुछ पल और गुज़ार ले....सवेरा होने को है..."
 समाप्त! 
- मोहित शर्मा (ज़हन) 
#mohitness #mohit_trendster #trendybaba

Sunday, January 6, 2013

मंद है यह समाज! Kavya Comic (Advertisement)

मंद है यह समाज! Kavya Comic (Advertisement) with a shayari, experimental manual coloring here. *Art - Soumendra.
कहते है वो की मै दुनिया की दौड़ के काबिल नहीं .. .
कुछ माखौल उड़ाते है तो कुछ को तरस आता है ..
कैसी यह दौड़ है जिसमे पैसो के लिये भावनाओं को कुचला जाता है?
नहीं दौड़ना तुम्हारे साथ ...मै तुमसा क़ातिल नहीं।

तेज़ तन पर गुमान करने वालो ..एक सौदा करलें आओ,
मेरा साफ़ मन भी ले लो ...बदले मे मुझे एक खूबसूरत जहान देते जाओ। 

- Mohit Sharma


Saturday, January 5, 2013

Janta Robots Zindabad!!

llll Janta Robots llll **Black Comedy-Satire** Ye ek satire hai India k adhiktar politicians par jo janta virodhi activities karne k baad bhi press conferences-public appearances mey janta k hiteshi bane rehte hai...doosro k dard, dukh par rajneeti karte hai, bina soche samjhe aag mey ghee daalne jaise bayaan de dete hai....rajneeti mey aane se apni maut tak rajneeti hi karte rehte hai...iska udeshya kisi ko thes pahunchana bilkul nahi hai. - Mohit Sharma (Trendster/Trendy Baba) with artist Dheeraj DK Boss





Friday, December 28, 2012

Chali Gayi Wo!

Brave girl "Damini" dies, a black day for Delhi-India. :(



 ...Chali gayi wo,
Wahan jahan uski khoobsurat surat si sabki seerat hogi...
Jahan bayano par bhadakne waali,
Anjaamo par tadapne waali bheed nahi hogi...

Yahan insaaf se pehle jaane kitni darkhwast lagani padti..
Seedhe khuda tak apni arzi lekar chali gayi wo...

Rakho apni nam aankhen apne paas...
Surkh daaman...aur num zehan lekar chali gayi wo...

Rishton ki dor se upar rutbe-rob ki daud hoti hai...
Ruthe jazbato par jahan rukhi rajneeti hoti hai...
.....iss jahan ko chhodkar....us aasma mey chali gayi wo...

RIP

:( Maaf kar dena sister kuch bas mey nahi hai...koshish karunga ki jald hi us sthiti mey aa paun ki kuch kar paun.

Image - mrpshow (DA)


http://www.facebook.com/photo.php?fbid=10200253791651457&set=a.1551579233408.72806.1352963897&type=1&theater

Tuesday, October 23, 2012

मेरी आज़ादी का रुआब! (Tibet's Non-Violent Struggle)

Self-immolation earlier today in Tibet. This photo shows 58 year old Dorjee Rinchen who had self-immolated near Labrang Monastery, calling for freedom in Tibet and return of the Dalai Lama. Dorjee Rinchen is the 6th person to have self-immolated in this month alone. Faced with unendurable conditions, Tibetans continue to light themselves on fire as their only means of protest - getting arrested and enduring years of torture in jail not being considered a viable alternative. More than fifty have done so in recent months.

I dedicate this poem to Non-Violent Struggle of the Tibetan People.....


दौर को चंद बातों से लाँघने की बिसात...
खुद मे धूल और चिंगारी समेटे वो किताब..
बंद हाथो की मुट्ठी मे वो ख्वाब...
आ छीन मुझसे मेरी आज़ादी का रुआब!! 

मेरे दिल की लौ से चिढती जो ये रात..
मारा गया जो नहीं चला खूनी कारवाँ के साथ...

कारवाँ से अलग अपने आशिएं मे है एक जिंदा लाश...
तेरा निज़ाम नहीं फ़ब्ता उसे, ओ नवाब..
आ छीन मुझसे मेरी आज़ादी का रुआब!!

जंग तुझसे नहीं तेरे खयालो से है...
बात मेरे ज़हन मे जलते सवालो की है...
गलत होकर भी सही ठहराये गये जवाबो से है...
जिनके पीछे रहकर तू राज करता उन हिजाबो से है...

अपने लोगो
की झुकी आँखों मे झाँक...उनमे...
...ज़ालिम तेरा अक्स नहीं...
....दिखेगा तुझे...मेरी आज़ादी का रुआब!!

शुक्रिया भी अदा करना है तेरा...
तेरे कायदों की कैद ने ही सिखाया असल जेहाद...

तेरी बंदिशें नाकाफी रहीं.. ..
मेरी आँखें तो कब से खुला आसमाँ देख रहीं...

कभी इस आसमाँ के नीचे हटेगा तेरा संगदिल नकाब...
तब फुर्सत मे देखना...मेरी आज़ादी का रुआब!!

तेरे फ़रेबो से बड़ा...
फितरत से बुजदिल सदा..
हर मौसम मे मनहूस खड़ा..
तेरी हर बुराई पर भारी
पड़ा...
बड़ा
ढीट है यह....मेरी आज़ादी का रुआब!!

- Mohit Sharma (Trendster/Trendy Baba)

Sunday, April 22, 2012

रूठी माँ



तेरे मना करने पर..
हाथ छुड़ाया मैंने...
दर्द पड़े जो सहने..
तुझको रुलाया मैंने..
दे चाहे मुझको जो सज़ा...

माना मेरी गलती है...
आँखें मेरी जलती है...
रूठी रहेगी कब तक ये बता..

छूना तेरा फबता है..
भीड़ मे डर लगता है..
संग लगा ले माये...

जादू तेरे हाथो मे..
मधु जो तेरी बातों मे..
नींद न आये माये..
झूला झुला दे माये...

खाऊं मै या मै खेलूँ...
एकटक निहारती तू क्यों..
जैसे मै तुझसे हूँ जुड़ा.. 

छाँव हो या हो धूप..
कितने तेरे जो रूप..
ममता मे तेरी ठंडक...
आँचल मे तेरे रौनक...
साये मे इसके होना मुझे रवां...

जो तू कहे मानूँगा...
तेरी रजा जानूँगा..
बस एक बार फिर से गोद मे ले सुला...


...समाप्त!

Poet Notes:

i) - Poem from my upcoming story "Maa ka Monologue".

ii) -  क्योकि ये कविता ऐसे विषय पर थी...इसलिए दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं देना पड़ा.....और समय भी कम लगा. :)

iii) - Pic Source - jpsuess.blogspot.com 


iv) - 400 Likes on my Facebook Page. http://www.facebook.com/Mohitness Thank you! everyone. :)